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बृज रज बनी गुलाल

LAKSHYA
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छायो रंग बसंत प्रेम रंग घोलन पै |
बृज रज बनी गुलाल ,लगाय ल्यो तनिक कपोलन पै ||
जब सै आये दिन फगुनारे |
गलियन घूम रहे हुरियारे ||
नाचें गोपी -ग्वाल थाप दै ढोलन पै |
बृज रज बनी गुलाल ,लगाय ल्यो तनिक कपोलन पै ||
राधा के चित चोर मुरारी |
ढूँढ रहे राधा बनवारी ||
पकड़ लये नंदलाल,द्वार के खोलन पै |
बृज रज बनी गुलाल ,लगाय ल्यो तनिक कपोलन पै ||
टेसू रंग भरे पिचकारी |
कान्हा ने राधा कै मारी ||
राधा गयीं बलिहारि कृष्ण के बोलन पै |
बृज रज बनी गुलाल ,लगाय ल्यो तनिक कपोलन पै ||
गोपी घेर रहीं गिरधर कौ |
आज न छोड़ें जा नटबर कौ ||
हर्षाये सब देव,कृष्ण की कुञ्ज किलोलन पै |
बृज रज बनी गुलाल ,लगाय ल्यो तनिक कपोलन पै ||
जा बृज की है अनुपम माया |
मुरलीधर ने रास रचाया ||
मुग्ध हुए त्रिपुरारि,श्याम के डोलन पै |
बृज रज बनी गुलाल ,लगाय ल्यो तनिक कपोलन पै ||
डा० उमाशंकर “राही ”
9412501633

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